Sunday, 8 July 2012

मोटापे को दूर रखना है तो सैर करे


लंदन। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि प्रतिदिन एक घंटे तक लगातार मंथर गति से पैदल चलें या सैर पर निकलें तो मोटापे का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक वैज्ञानिकों के मुताबिक मोटापे को दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका हर दिन नियमित रूप से एक घंटे के लिए टहलना या सैर पर जाना है। इससे मोटापे के लिए जबावदेह माने जाने वाले जीनों की सक्रियता 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है।
अमेरिकी के बोस्टन के हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डिपार्टमेंट ऑफ न्यूट्रीशन ने मोटापे की आनुवांशिक सम्भावना वाले 10,000 लोगों पर एक अध्ययन कर ये परिणाम प्रस्तुत किए।
मुख्य शोधकर्ता क्विन की ने कहा, ''हमारे अध्ययन के मुताबिक प्रतिदिन एक घंटा चलने से मोटापे की ओर आनुवांशिक सक्रियता कम हो जाती है। वजन व लम्बाई के अनुपात (बीएमआई) में अंतर को माप कर इसका पता लगाया जाता है। प्रतिदिन टहलने से बीएमआई घटकर आधा रह जाता है।''
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि जो लोग एक दिन में चार घंटे तक बैठकर टीवी देखते है, उनमें मोटापे का आनुवांशिक खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

उपवास में रहें ऊर्जावान


उपवास का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप व्रत के दौरान क्या खाते हैं। लबे समय तक भूखे रहने से वजन घटना, डायरिया, उल्टी, पेट में दर्द, पेशाब में जलन, पानी की कमी, रक्तचाप में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। नवरात्र में जो लोग पूरे नौ दिन के व्रत रखते हैं, उन्हें सुबह के समय फलों का जूस, नारियल पानी और सूखे मेवे खाने चाहिए। इससे एसिडिटी भी नहीं बनेगी।
ध्यान दें
1. तला भुना खाने की बजाय आहार में अधिक से अधिक तरल पदार्थ शामिल करें। लस्सी व फलों का रस लेने से देर तक भूख नहीं लगती और शरीर में नमी भी बनी रहती है।
2. तले हुए आलू की चाट बनाने की बजाय उबले हुए आलू की चाट खाएं। 3. खीर के स्थान पर दही में सभी फल काटकर खाएं।
4. आप समक के चावल की इडली और डोसा भी बना सकते हैं। यह सेहत के लिए भी बेहतर है।
5. दिन भर पानी पीते रहें। नारियल पानी और नींबू पानी पीने से शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकलते हैं।
6. कद्दू और लौकी की सब्जी भी बनाकर खा सकते हैं। इससे मुंह का जायका बना रहेगा।
7. भूख लगने पर कुट्टू की पकौडि़यां खाने की बजाए भुने हुए मखाने, मूंगफली, बादाम और अखरोट खाएं।
8. लबे उपवास में व्रत खोलने का तरीका भी मायने रखता है। यदि आपने नौ दिनों का उपवास रखा है, तो उपवास खोलने के बाद 18 दिनों तक अपने आहार और जीवनशैली का ध्यान रखें। शुरुआत में पानी व अन्य पेय पदाथरें पर ही जोर रहना चाहिए। उबली हुई सब्जिया व दाल का पानी फायदेमद होता है।

सेब-संतरा खाओ, ब्लड क्लॉट से छुटकारा पाओ

अगर आप रोजाना एक सेब या संतरा खाते हैं तो आपको ब्लड क्लॉट यानी खून के थक्के जमने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक हावर्ड मेडिकल स्कूल की एक टीम ने पाया है कि सेब, संतरा और प्याज में 'रूटिन' नामक रसायन धमनियों और शिराओं में खून के थक्के जमने से रोक सकता है। उनका मानना है कि 'रूटिन' ब्लैक और ग्रीन टी में भी हो सकता है। इसका इस्तेमाल भविष्य में दिल का दौरा पडऩे से बचाने के लिए इलाज के तौर पर हो सकता है। टीम ने शोध में पाया कि रसायन ने उस खतरनाक एंजाइम को रोकने में मदद की, जिसकी खून का थक्का जमाने में भूमिका होती है। प्रोटीन डाइसल्फाइड आइसोमरेज (पीडीआई) नाम का यह एंजाइम बेहद तेजी से रिलीज होता है, जब धमनियों और शिराओं में खून का थक्का जमता है। वैज्ञानिकों ने कंप्यूटरों पर वैज्ञानिक मॉडलों का इस्तेमाल करते हुए पीडीआई को रोकने के लिए रूटिन समेत 500 अलग-अलग रसायनों की क्षमता की जांच की। उन्होंने रूटिन को सबसे ज्यादा असरदार पाया।

झुर्रियां से बचना है, तो बचपन से रखें त्वचा का ख्याल

skin care
यदि आप बचपन में ही अपनी त्वचा का खास ख्याल रखें तो आप ढलती उम्र में झुर्रियों की परेशानी से बच सकते हैं। क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ऑससुन रिसर्च लैब के शोधकर्ता माइकल किमलिन के एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। किमलिन ने कहा, "अपनी त्वचा को झुर्रियों व त्वचा सम्बंधी अन्य परेशानियों से बचाने के लिए आपको बचपन और किशोरावस्था से ही उसका खास ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए। यदि आप कमउम्र से ही धूप से अपनी त्वचा का बचाव करते हैं तो आपकी त्वचा जीवनभर अच्छी रह सकती है।" 'साइंस ऑफ द टोटल एन्वायरॉनमेंट' जर्नल के मुताबिक किमलिन के अनुसार अध्ययन में पाया गया कि यह बहुत महत्वपूर्ण होता है कि व्यक्ति अपने जीवन के शुरुआती 18 साल में पराबैंगनी किरणों के सम्पर्क में कितना रहा। ये किरणें कैंसर की कारक हो सकती हैं, इनसे त्वचार खराब होती है और उसमें झुर्रियां आती हैं। विश्वविद्यालय से जारी एक वक्तव्य के अनुसार किमलिन कहते हैं कि 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की त्वचा धीमी गति से खराब होती है। परिणाम बताते हैं कि उस उम्र में भी त्वचा को नुकसान पहुंचता है। इसलिए धूप से बचाव जीवनभर करना चाहिए। अध्ययन में एक यूवी कैमरा का इस्तेमाल किया गया था। इस कैमरे से त्वचा को पहुंचे नुकसान की तस्वीरें ली गईं। साथ ही नग्न आंखों से न दिखने वाली झुर्रियों को भी देखा गया। इस तरह से त्वचा पर धूप के प्रभाव व इससे त्वचा कैंसर के खतरे का अध्ययन किया गया। किमलिन ने कहा कि त्वचा को ज्यादातर नुकसान जीवन के शुरुआती वर्षो में पहुंचता है। बाद में आगे के वर्षो में 50 साल की उम्र तक त्वचा में धीमी गति से नुकसान होता है। अध्ययन में 18 से 83 साल उम्र के 180 लोगों को शामिल किया गया। यूवी कैमरे से उनकी त्वचा की तस्वीरें ली गईं और उनसे पूछा गया कि वे धूप में कितने समय तक रहते हैं। त्वचा को पहुंचे नुकसान का पता लगाने के लिए उसमें हाइपरपिगमेंटेशन (पराबैंगनी किरणों से बचाव के लिए त्वचा में वर्णक इकट्ठे हो जाते हैं) मापा गया।

वजन घटाने के लिए अच्छी हैं गर्मियां


नई दिल्ली। यदि आप अपने शरीर को सही अनुपात में लाना चाहते है और वजन घटाना चाहते है तो गर्मियों के दिन इसके लिए एकदम उपयुक्त है। गर्मियों की शुरुआत हो गई है और इस मौसम में छरहरा होने के लिए आपको डाइटिंग करने की जरूरत नहीं है।

दिल्ली स्थित मैक्स हेल्थकेयर की प्रमुख डाइटीशियन ऋतिका समादार बताती है कि इस मौसम में लोगों की खान-पान की आदतें स्वत: ही बदल जाती है। ''सर्दियों की तुलना में गर्मियों में वजन कम करना अधिक आसान है क्योंकि इस मौसम में अधिक व्यायाम किया जा सकता है। इस मौसम में शरीर की कार्य प्रणाली धीमी हो जाने की वजह से आप ज्यादा नहीं खाते है। साथ ही आप तरल पदार्थ ज्यादा लेते है जो शरीर से अशुद्ध पदार्थो को दूर करते है।''


वजन कम करने का सबसे आधारभूत तरीका यह है कि आप बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन लें। अपने भोजन को सुबह के नाश्ते, दोपहर के भोजन, शाम के नाश्ते व रात्रिभोज में बांटे।

फोर्टिस हेल्थकेयर में चिकित्सकीय पोषण विभाग की प्रमुख निधि एस. यादव बताती है, ''दिन की शुरुआत हल्के गर्म पानी में शहद मिलाकर पीने के साथ करनी चाहिए। जो लोग चाय पीते है, वे एक प्याला चाय के साथ मारी बिस्कुट खा सकते है और दो या तीन अखरोट या बादाम ले सकते है।''

उन्होंने कहा, ''दो घंटे के अंतराल के बाद आप सलाद या फल ले सकते है। दोपहर के भोजन में दो विभिन्न अनाजों के आटे से बनी दो चपातियां, एक कटोरी दाल व हरी सब्जियां होना चाहिए। शाम के नाश्ते में एक प्याला चाय और इडली या ढोकला या भुना चना ले सकते है।''

उन्होंने बताया, ''रात्रिभोज में सब्जियों का सूप, ब्राउन ब्रेड या चपाती और सब्जी लेना चाहिए। यदि सोने के लिए जाने से पहले कोई भूख महसूस करे तो वह एक गिलास दूध ले सकता है।''

कैलोरीज को दूर रखने के लिए फल लेना जरूरी है लेकिन केला, आम और अंगूर जैसे फलों से बचना चाहिए क्योंकि उनमें कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है। तरबूज और संतरा ज्यादा बेहतर है। भोजन से 40 मिनट पहले या भोजन के दो घंटे बाद फल खाना चाहिए। यदि आप वजन कम करना चाहते है तो फलों का जूस पीने से बचें।

नेशनल डाइबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन की पोषण एवं वसा अम्ल शोध प्रमुख स्वाति भारद्वाज कहती है कि वसा की अधिक मात्रा वाला दूध, तला-भुना खाने, शर्करा व मीठे उत्पादों, मैदा व मैदा से बनी चीजों जैसे समोसा, कचौड़ी व भटूरा खाने से बचना चाहिए।

भारद्वाज ने कहा कि लाल मांस का भी सेवन नहीं करना चाहिए। साबुत अनाज,  सब्जियां, साबुत दालें, सलाद, चिकन या मछली को भोजन में शामिल करना चाहिए।

Saturday, 7 July 2012

पौष्टिक नास्ता !!

सुबह का पौष्टिक नास्ता   दिन भर   आदमी  को  फुर्ती प्रदान करता है .रातभर के लम्बे अन्तराल  के बाद  सुबह  शरीर को ऊर्जा की जबरदस्त जरुरत होती है ,और ऊर्जा हमें पौष्टिक नास्ते से ही मिल सकता है .इसके लिए हम नास्ते में ताजे फल ,अंकुरित अनाज ,दूध .अंडे आदि ले सकते है.

कैसे भी मुंहासे हों, घर पर बने इस आयुर्वेदिक तेल से साफ हो जाएंगे

आयुर्वेद में मुहांसों को यौवन  पीडि़का भी कहा जाता है। यौवन पीडि़का यानी यौवन में पीड़ा देने वाली यह समस्या तकलीफ तो देती ही है साथ ही चेहरे भी भद्दा दिखाई देता है। इस उम्र में जिन्हें मुंहासों की समस्या हो उन युवाओं को अपने खाने में तेज मिर्च मसाले वाले, खट्टे तीखे पदार्थों को शामिल नहीं करना चाहिए।



दोनों वक्त, सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले पेट साफ होना आवश्यक है। भोजन करते समय खाना ठीक से चबाना चाहिए। इतना करते हुए, मुहांसे ठीक करने के लिए, निम्रलिखित दवाई का सेवन करना चाहिए।

सामग्री-पलाश के फूल, लाल चंदन, लाख, मजीठ, मुलहठी, कुसुम, खस, पदमाख, नील, कमल,बड़ की जटा, पाकड़ की मूल, कमल केशर, मेंहदी, हल्दी, दारुहल्दी और अनन्तमूल-सभी 16 द्रव्य 50-50 ग्राम। तिल का तैल 200ml बकरी का दूध 200 ml और पानी 3 लीटर।



कैसे बनाएं-सब द्रव्यों को खूब कूट पीस कर महीन कपड़ छन चूर्ण कर लें। फिर तीन लीटर पानी में इन्हें इतनी देर तक उबालें कि पानी एक चौथाई बचे। इसे छान लें। अलग से केशर, मजीठ, मुलहठी, लाख व पतंग 10-10 ग्राम ले कर लुगदी बनाकर इसमें डाल दें। फिर तैल व बकरी का दूध डाल कर मंदी आंच पर पकाएं। जब पानी व दूध जल जाए, सिर्फ तैल बचे, तब उतार कर ठंड कर लें और छान कर बाटल में भर लें।



 मात्रा और सेवन विधि- अनामिका अंगुली से तैल मुहांसों पर लगा कर चेहरे को मलना चाहिए। एक बार सुबह स्नान करने से आधा घंटा पहले और दूसरी बार रात को सोने से आधा घंटा पहले इस तैल लगा कर मसाज करें।