Sunday, 8 July 2012

फिश स्पा एवं पेडिक्योर से फैल रही हैं बीमारियां

spa,pedicure
सुंदर और स्मार्ट दिखने की बढ़ती होड के कारण महिलाओं में विशेष मछलियों के जरिए स्पा एवं पेडिक्योर कराने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इसके कारण गंभीर बीमारियां एवं संक्रमण फैल रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि फिश पेडिक्योर के कारण एड्स, एचआईवी, सोरायसिस, एक्जीमा एवं अन्य त्वचा रोग फैल रहे हैं। एशियन इंस्टीट्‍यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एआईएमएस) के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित बांगिया कहते हैं ये मछलियां खुद कई तरह के जीवाणुओं एवं बीमारियों को फैलाती है और साथ ही फिश स्पा एवं पेडिक्योर के दौरान एक व्यक्ति के संक्रमण दूसरे तक पहुंचते है। कई मामलों में संक्रमण इतने गंभीर होते हैं कि पैर काटने की नौबत आ जाती है। खास कर वैसे लोगों में जो मधुमेह से पीडित होते हैं। फिश स्पा एवं पेडिक्योर के तहत गर्रा रूफा प्रजाति की मछलियों से हाथों और पैरों की मृत त्वचा की सफाई कराई जाती है। ये मछलियां टर्की से मंगाई जाती हैं। इन मछलियों के दांत नहीं होते, इसलिए स्पा कराने पर दर्द नहीं होता। अब कई पार्लरों एवं ब्यूटी सेंटरों ने घर-घर जाकर भी फिश स्पा देने की सेवा शुरू कर दी है। देश के महानगरों में फिश स्पा कराने वाले सेंटरों की भरमार हो गई है। जहां फिश स्पा एवं पेडिक्योंर करने की फीस ।50 रुपए से लेकर 500 रुपए तक होती है। इन सेंटरों की ओर से दावा किया जाता है फिश-स्पा के बाद त्वचा चिकनी हो जाती है तथा इससे त्वचा संबंधी कई बीमारियों में भी लाभ पहुंचता है। हालांकि इन दावों को अभी तक साबित नहीं किया जा सका है। दूसरी तरफ नए अध्ययनों से पता चला है कि यह कई तरह की बीमारियों को न्यौता देता हैं। यही नहीं यह सामान्य स्क्रब से अधिक असरदार नहीं होता है। FILE फिश स्पा की शुरुआत टर्की में कनगाल नामक स्थान पर गर्म पानी के सोते से हुई, जहां पर वर्ष ।9।7 में एक स्थानीय चरवाहे ने गर्रा रूफा मछली द्वारा चिकित्सकीय लाभ का पता लगाया। कहा जाता है कि गर्रा रूफा मछली डाइर्थाइनोल नामक एन्जाइम उत्सर्जित करती है, जो त्वचा में नया जीवन भरते हैं। लेकिन नए अध्ययनों से पता चलता है कि ये मछलियां संक्रमण एवं बीमारियां फैलाने वाले जीवाणुओं को भी अपने साथ लाती हैं। इनमें से कुछ बैक्टीरिया पर तो एंटीबायोटिक का भी असर नहीं पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि फिश स्पा एवं पेडिक्योर कराने से एड्‍स, एचआईवी के चपेट में आने का खतरा हो सकता है, खास तौर पर तब जब आपके पैरों में जख्म हो। डॉ. बांगिया के अनुसार जब मछलियां पैरों एवं हाथों से मृत कोशिकाओं को काटती है। ऐसे में अगर पैरों में जख्म या वे कहीं से कटा हुआ हो तो रक्त बहने लगता है। चूंकि कई महिलाओं या पुरुषों को एक ही टब में स्पा दिया जाता है और इस कारण एड्‍स तथा एचआईवी जैसे संक्रमणों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं आम तौर पर ज्यादातर सेंटरों में कई-कई दिनों तक स्पा टब का पानी भी नहीं बदला जाता। ऐसे में जब एचआईवी संक्रमित या हेपेटाइटिस-सी के मरीज स्पा में आते हैं और अगर इनके हाथ तथा पांव पर घाव होते हैं, तो मछलियां इन जख्मों को कुरेद देती हैं। कुरेदे गए जख्म से रक्त का रिसाव होता है जो पानी को संक्रमित कर देता है और जब अन्य महिलाएं इस पानी के संपर्क में आती हैं तो उनके विषाणुओं के चपेट में आने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। यही नहीं जिन लोगों को मधुमेह और सोरायसिस जैसी बीमारी हैं, उनके लिए संक्रमण होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसके अलावा, जिनकी रोग प्रतिरक्षण क्षमता कमजोर है उन्हें फिश स्पा लेने से बचना चाहिए। डॉ. बांगिया का कहना है कि मधुमेह के मरीजों, कम रोग प्रतिरक्षण क्षमता वाले लोगों एवं त्वचा रोगों से पीडि़त लोगों को फिश स्पा कराने से बचना चाहिए। इसके अलावा स्पा के पानी एवं इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को अच्छी तरह से किटाणुमुक्त स्टेरेलाइज किया जाना चाहिए तथा पानी का दोबारा इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। फिश स्पा में इस्तेमाल होने वाली मछलियां बेहद महंगी होती हैं इसलिए भारत में कई सेंटरों पर इसी परिवार से संबंधित प्रजाति चिन-चिन या उनसे मिलती-जुलती मछलियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें से कई काटती भी हैं और एक-दूसरे तक यह मछलियां जीवाणुओं एवं विषाणुओं को फैलाती रहती हैं। ज्यादातर सेंटरों में फिश स्पा के पानी की सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जाता। इस पानी को साफ एवं जीवाणुओं से मुक्त रखने के लिए फिल्टरेशन, ओजोनाइजर तथा अल्ट्रावायलेट किरणों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा कम ही सेंटरों में होता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बार-बार स्पा एवं पेडिक्योर कराने से अंदर की ओर बढ़ने वाले नाखूनों में समस्या हो सकती है। पेडिक्योर कराने के दौरान नाखूनों की उपरी परत को रगडा़ जाता है, जिससे इसकी ऊपरी परत घिसती है और साथ ही साथ इसकी नमी भी खत्म होने लगती है और नाखून कमजोर हो जाते हैं।

जब नींद ना आए, तो करें उपाय



  • * नियमित दिनचर्या रखें। सोने तथा जागने का समय निर्धारित करें तथा उसी समय पर जागें तथा सोएं।
  •  * तनाव को दूर करने का प्रयास करें।
  •  * नियमित व्यायाम करें।
  •  * रात के समय ज्यादा गरिष्ठ भोजन न करें, खाना खाने के बाद थोड़ा टहलें। नींद का हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। प्रकृति ने हमें नींद का अनमोल उपहार प्रदान किया है। अतः अनिद्रा को गंभीरता से लें तथा उसका कारण जानकर उसको दूर करने का प्रयास करें।
  •  * सोने से पहले 1 गिलास कुनकुने दूध में शहद डालकर पीएं। 
  •  * सोते समय सूती व ढीले, आरामदायक कपड़े पहनें। * बांई करवट सोएं तथा ज्यादा ऊंचा तकिया न रखें।
  •  * सोते समय पसंदीदा मधुर संगीत सुनें या कोई पत्रिका पढ़ें। 
  •  * नहाकर सोने से अच्छी नींद आती है।
  •  * कमरे में लाइट बंद करके सोएं। 
  •  * बिस्तर पर हल्के रंग की चादरों का इस्तेमाल करें व साफ-सफाई का ध्यान रखें।


दांतों में छिपा है खूबसूरत मुस्कुराहट का राज

smile
मुस्कुराता हुआ चेहरा हर व्यक्ति को अच्छा लगता है लेकिन इसके लिए दांतों का खूबसूरत होना भी बेहद जरूरी है वरना मुस्कुराहट असरदार नहीं होगी। इस मुस्कुराहट को असरदार बनाना अब चिकित्सा जगत के अभिनव प्रयोगों से बेहद आसान हो गया है। ऑथोडोन्टिस्ट डॉ. एमएम शर्मा ने कहा ‘दूरियों को कम करने में मुस्कुराहट के महत्व से कोई इंकार नहीं कर सकता और इस मुस्कुराहट को आकर्षक बनाने में दांतों की बड़ी भूमिका होती है। मनुष्य के 32 दांत होते हैं जिनमें से 28 दांत वर्किंग टीथ होते हैं। पीछे की ओर के चार दांत चबाने के लिए प्रयुक्त होते हैं और मुस्कुराते समय ‘स्माइल विंडो’ से नजर भी नहीं आते। स्माइल विंडो से आगे के छह से दस दांत दिखते हैं और खूबसूरत मुस्कुराहट का राज भी इन्हीं में छिपा होता है।’ ऑथोडोन्टिस्ट डॉ. अमित शर्मा के अनुसार, अक्सर टेढ़े या आगे की ओर निकले दांतों को एक विशेष प्रकार के तार से बांध कर सही जगह लाने की कोशिश की जाती है। शुरू में यह तार लगाने पर मुंह में थोड़ी दिक्कत होती है और खिंचाव महसूस होता है। यही खिंचाव दांतों को सामान्य स्थिति में लाता है। खाते समय यह तार निकाला जा सकता है क्योंकि जिस तरह दांतों में फंसे अन्न कणों से दांत खराब हो सकते हैं उसी तरह इस तार में अगर अन्न कण फंस जाएं तो दांतों को नुकसान हो सकता है। दंत चिकित्सक मधु घई कहती हैं कि एक ही आकार के चमचमाते दांत जहां चेहरे को नैसर्गिक सौंदर्य प्रदान करते हैं वहीं टेढ़े दांतों से अच्छा खासा चेहरा खामी वाला नजर आता है। डॉ. मधु ने कहा कि अब टेढ़े-मेढ़े दांतों को सुधार कर सही करना संभव हो गया है। अगर दांतों का रंग पीला हो गया हो तो न केवल उन्हें सफेद किया जा सकता है बल्कि उनकी जगह, आकार और टेक्स्चर तक को सुधारा जा सकता है। यह सब इतनी सफाई से किया जाता है कि दांत और मुस्कुराहट बिल्कुल स्वाभाविक लगते हैं। डॉ. कपूर के मुताबिक अगर दांतों के बीच में गैप हो तो स्वाभाविक मुस्कुराहट के लिए इस गैप को बेहद सफाई से सिरेमिक की मदद से भरा जाता है। इसी तरह टूटा दांत या खराब दांत भी इम्प्लान्ट लगा कर दुरूस्त किया जा सकता है। तंबाकू खाने से या कभी किसी दवा की वजह से दांतों पर धब्बे बन जाते हैं जिन्हें ब्लीच से दूर किया जा सकता है। डॉ. शर्मा ने कहा कि आम तौर पर दांत अपनी जगह पर ही उगते हैं, लेकिन कभी कोई दांत अपनी जगह से थोड़ा हट कर उगता है। उसे उसकी सही जगह पर लगाया जा सकता है। यदि शिफ्टिंग मामूली है तो उसमें दो या तीन माह लगते हैं लेकिन अधिक दूरी पर इसे लगाना हो तो दो साल और अधिक समय भी लग सकता है। तंबाकू के सेवन या देखभाल में मामूली-सी लापरवाही की वजह से मसूड़ों पर भी धब्बे बन जाते हैं। इन्हें भी दूर किया जा सकता है। अगर दांतों का आकार सामान्य से अधिक लंबा हो तो उन्हें भी घिस कर ठीक किया जा सकता है।

भरपूर नींद बचाये डायबिटिज से


आप भी उन लोगों में शुमार है, जो यह सोचते है कि चार-पांच घंटे की नींद ले लेना हमारे शरीर के लिए पर्याप्त है। यदि आपकी सोच वाकई ऐसी है, तो अपनी सोच को बदल डालिए। यह कहना है जर्मनी के वैज्ञानिकों का।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस बात के परीक्षण के लिए हमने 500 लोगों पर करीब पांच साल तक अध्ययन किया। अध्ययन से पता चला कि जो लोग प्रतिदिन छह घंटे से कम नींद लेते है, उनके शरीर में ब्लड शुगर का लेवल सही नहीं रहता है। इसके विपरीत जो लोग प्रतिदिन छह या सात घंटे की नींद लेते है, उनके शरीर में ब्लड शुगर का संतुलन सही रहता है।
इस अध्ययन की प्रमुख डॉ. मैरियन का कहना है कि अध्ययन से यह भी पता चला है कि कम नींद लेने के कारण डायबिटीज के साथ-साथ, डिप्रेशन, लो और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जब हम सोते है तो शरीर एक प्रकार से अपनी मरम्मत कर रहा होता है। यदि शरीर को अपनी मरम्मत करने का पूरा समय नहीं मिलेगा, तो जाहिर है कि हमें विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना ही पड़ेगा।

दही से बनाएं सेहत


हमारे खानपान में कई ऐसी चीजें शामिल होती हैं, जिनमें खूबसूरती और स्वास्थ्य का अनमोल खजाना छुपा होता है। इनमें एक है दही। दही में दूध की अपेक्षा कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, लैक्टोज, आयरन, फास्फोरस आदि पाया जाता है, इसलिए दही को अधिक पोषक माना जाता है।

अन्य गुण

- आयुर्वेद में बताया गया है कि रात को दही नहीं खाना चाहिए। हमेशा ताजे दही का इस्तेमाल करना चाहिए।

- चेहरे पर दही लगाने से त्वचा मुलायम होने के साथ उसमें निखार भी आता है। अगर दही से चेहरे की मसाज की जाए तो यह ब्लीच के जैसा काम करता है। इसका प्रयोग बालों में कंडीशनर के तौर पर भी किया जाता है।

- गर्मियों में त्वचा पर सनबर्न हो जाने पर दही मलने से राहत मिलती है।

- दही का सेवन करने से पाचन दुरुस्त रहता है और प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है।

- दही में कैल्शियम के चलते हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी से लड़ने में भी मददगार है।

- हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को रोजाना दही का सेवन करना चाहिए।

- दही में अजवायन डालकर खाने से कब्ज दूर होता है।

- दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है। मुंहासे दूर होते हैं।

- दही को आटे के चोकर में मिलाकर लगाने से त्वचा को पोषण मिलता है और त्वचा कातिमय बनती है।

- सिर में रूसी होने पर भी दही फायदेमंद होता है। ये रूसी को हटाकर बालों को मुलायम बनाता है।

अब जिम क्या जाना

फिटनेस को लेकर ग‌र्ल्स बहुत सजग है। ग‌र्ल्स के बीच इन दिनों फिट है तो हिट है का फार्मूला शबाब पर है। जाहिर है कि वे जॉब, स्टडी और फ्रेंड सर्किल की व्यस्तता के बीच बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन के माध्यम से फिट रहने के लिए समय निकाल रही है।

उपवास और सही नींद
उपवास रहना और समय से सोना दादी-नानी द्वारा बताया गया पुराना नुस्खा है, जो सेहत के लिए सबसे अधिक कारगर है। तलवलकर्स फिटनेस व ब्यूटी सेंटर की एक्सपर्ट गरिमा निगम बताती है, '' ज्यादा खाना खाने के बजाय फल, जूस और सलाद का सेवन जरूर करे। व्यस्त जीवन में समय से सोना बहुत कठिन है। फिर भी कोशिश करे कि देर रात टीवी देखने और पार्टी में शामिल होने की बजाय समय से सो जाएं। ये शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्थितियों के लिए अच्छा होगा। 8 घंटे की कंपलीट नींद थकान, दर्द और आलस्य से निजात दिलाती है और अगले दिन के लिए फिट कर देती है। इससे आपकी दिनचर्या तरोताजा बनी रहेगी। ''

हरियाली का रास्ता

डाइट में हरी सब्जियों को शामिल करे। ये स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। डाइटीशियन डॉ. मीनाक्षी अनुराग बताती है, ''सब्जियों में पाये जाने वाले फाइबर, आयरन और विटामिंस वसा को कम करने में सहायक होते है। हरी सब्जियों में फाइटोकेमिकल्स होते है। ये पाचनतंत्र और लीवर को सही रखने में मदद करते हैं।''

खूब पिएं पानी

डॉ. एस. के. सक्सेना बताते है, ''शरीर में पानी की कमी न होने दें। एक बार भी डिहाइड्रेशन हुआ तो शरीर से न्यूट्रिएंट घट जाएंगे और ये आपकी खूबसूरती व स्किन की चमक को कम करेगे। पानी के अलावा खीरा, खरबूजा, ककड़ी, टमाटर खाएं। इनमें प्रचुर मात्रा में पानी और मिनरल्स होता है। इनमें मौजूद पानी डिटॉक्स करने का काम करेगा और मिनरल्स सिस्टम को हेल्दी करने का।''

मसाज है जरूरी

फिजियोथेरेपिस्ट स्टैनली ब्राउन बताते है, ''डाइट के साथ ही मसाज फिट रहने के लिए बहुत जरूरी है। स्पा जाने के बजाय सप्ताह में एक बार घर पर ही ऑलिव ऑयल से गर्दन हाथ, पैर और कंधों पर मॉलिश करे। ये वे अंग है जिन पर सबसे अधिक स्ट्रेस पड़ता है, लेकिन ध्यान रखें कि मसाज करने के बाद गरम पानी से नहाना जरूरी है। ''

व्यायाम है लाभकारी

बाहर मत निकलिए, लेकिन घर पर ही सही व्यायाम के लिए थोड़ा वक्त तो निकाल ही लीजिए। व्यायाम करने से पसीने के जरिए शरीर के टॉक्सिंस निकल जाते है और बॉडी में ऑक्सीजन अधिक एब्जार्ब होती है। छत पर कुछ देर उछलिए, रस्सी कूदिए , डांस करिए या फिर तेज कदमों से चलिए। योग और मेडिटेशन भी काफी हद तक तनावमुक्त रखने में मदद करते है

आलू के असरकारी नुस्खे


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potato

  • रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है। - कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएं।
  •   शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।
  •   भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है।
  •  आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है। 
  •   चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएं। इससे गठिया ठीक हो जाता है।
  •  गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं।
  •  उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएं तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है।
  •  आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा।
  •   आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में शहद मिलाकर भी पिला सकते हैं।

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