Friday, 20 April 2012

गर्मियों में टेस्ट और हेल्थ दोनों चाहिए तो रोजाना खाएं आइस्क्रीम क्योंकि.....

ice-cream
मिल्क, क्रीम शुगर और सुगंध का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है आइस्क्रीम। गर्मियों के सीजन में आइस्क्रीम हर पार्टी की शान होतीहै। ये मेजबान और मेहमान दोनों को ठंडक देने के साथ ही चुभती गर्मी से राहत देती है। आइस्क्रीम के कई फ्लेवर इस समय बाजार में उपलब्ध है। लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रिय फ्लेवर हैं वनिला, स्ट्राबेरी, चाकलेट, बनाना और फ्रेश कॉफी। आइस्क्रीम का लुत्फ वैसे तो गर्मियों में सभी उठाते हैं। लेकिन गर्मी में रोजाना आइस्क्रीम खाने के फायदे बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं गर्मियों में रोजाना आइस्क्रीम खाने के फायदे.... एक रिसर्च के मुताबिक कुछ डेयरी प्रोडक्ट जैसे कि चीज़ और आइस्क्रीम भी कैल्शियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। आइस्क्रीम में विटामिन डी, ए, बी12 और के मिलता है जिसकी वजह से आइस्क्रीम हड्डी को मजबूत बनाने के साथ ही स्कीन को मुलायम बनाता है। नसों व रक्त प्रवाह के लिए भी ये लाभदायक है। माना जाता है कि आधा कप आइस्क्रीम रोजाना खाने से शरीर को 10 प्रतिशत प्रोटिन की मात्रा मिलती है। दांत निकलने के बाद भी आइस्क्रीम खाना अच्छा मानते हैं। इससे इनेमल वाली जगह की सिकाई हो जाती है और रक्त बहना रूक जाता है।

Sunday, 4 March 2012

होली पर रखें सेहत का ध्यान


होली का त्योहार नजदीक है। इस दिन हर कोई जश्न में डूबा रहेगा। होली खेलने के साथ-साथ लोग जमकर खाने-पीने का लुत्फ उठाएंगे। मगर मौज-मस्ती में सेहत को नजरअंदाज करना आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। कहीं ऐसा न हो कि रंगों के त्योहार पर एक गलती आपकी पूरी जिंदगी को बेरंग कर दे। ऐसे में होली पर कुछ सावधानी बरतनी भी जरूरी है :
सावधानी
* कई बार होली खेलते समय रंग आंखों में चला जाता है। इन रंगों में केमिकल्स होने के कारण आंख लाल हो जाती है और उससे पानी आने लगता है। आंख में चुभन और जलन होने लगती है। कई बार तो सूजन आ जाती है और आंख खोलने में दिक्कत होती है। ऐसा होने पर आंख को बार-बार साफ पानी से धोएं। ज्यादा समस्या होने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें।
* रसायनिक रंग शरीर के अन्य हिस्सों पर भी बुरा असर डालते हैं। जहा तक मुमकिन हो गुलाल से या फिर हर्बल रंगों से ही होली खेलें। हर्बल कलर हमारी त्वचा के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
* होली का आनद लेने के बाद जितनी जल्दी हो सके रंगों को छुड़ाएं। कपड़ों और सिर से जितना सूखा रंग झाड़ कर निकाल सकते हैं, निकाल दें। उसके बाद सूखे, मुलायम कपड़े से रंग छुड़ाएं।

Saturday, 3 March 2012

जाच परख कर खाएं खोया


होली का त्योहार नजदीक है। ऐसे में सबसे ज्यादा बाजार मिठाइयों का सज रहा है। इनमें अस्सी फीसदी मिठाइया खोए से बनती है। ऐसे में दुकानदार मुनाफा कमाने के लिए खोए में उबला हुआ आलू, शकरकंद, मैदा या अरारोट इत्यादि की मिलावट करने से परहेज नहींकरते। यह मिलावट सेहत केलिए खतरनाक है।
स्वास्थ्य को नुकसान
* आलू और शकरकंद मिला खोया खाने से पेट खराब हो जाता है। पाचन तत्र और आतों को नुकसान होता है।
* कब्ज, उल्टी, दस्त, पेटदर्द व गैस की बीमारी हो सकती है।
* लबे समय तक ऐसी मिठाइयों के इस्तेमाल से खून की कमी होने का डर भी रहता है।
* बच्चों के पाचन तत्र और नर्वस सिस्टम पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही शरीर में सूजन हो सकती है।
पहचान के तरीके
* सिथेटिक खोए को पानी में मिलाकर फेंटें तो वह टुकड़ों में बटकर अलग-अलग हो जाता है, जबकि असली खोया पतला होकर पानी में घुल जाएगा।
* असली खोया हाथ से रगड़ने पर चिकनाई छोड़ेगा।
* खोया असली होगा तो कच्चे दूध का स्वाद आएगा।
* मिठाई या खोए में टिंचर आयोडीन की 5-7 बूंदें और 5-7 दाने चीनी के बुरक दें और गरम करें। अगर खोए या मिठाई का रंग नीला हो जाए तो समझ लीजिए कि मिलावट है।
* मिठाई के टुकड़े पर हाइड्रोक्लोरिक एसिड की 5-6 बूंदें डालें। मिठाई का रंग गुलाबी हो जाए तो मिलावटी है।

Monday, 13 February 2012

कान-दर्द ऐसे होगा गायब

कान में दर्द की शिकायत कान के अंदर सूजन या सक्रमण के कारण हो सकती है। यदि बाहरी कान में सक्रमण हो, तो उसे ओटाइटिस एक्सटर्ना कहते हैं। यदि कान के मध्यवर्ती भाग में सक्रमण हो, तो उसे ओटाइटिस मीडिया कहते हैं। कभी-कभी कान के पर्दे में गीलापन आ जाता है।। इस कारण भी कान में दर्द सभव है।
अन्य कारण
जुकाम: जुकाम में भी कान में दर्द होता है। इसके साथ-साथ बुखार, नाक बहना व सिरदर्द भी सभव है। यह शिकायत तीन से सात दिनों में स्वत: ठीक हो जाती है।
ओटाइटिस
इस शिकायत में कान दर्द बढ़ता जाता है। भूख कम लगती है, थूक व खाना निगलने में दर्द महसूस होता है। चिड़चिड़ापन, नींद न आना व चक्कर आता है। कभी-कभी कान से सफेद पीला या भूरे पस का रिसाव होता है। सुनने की शक्ति भी कम होती जाती है। नाक, कान व गला विशेषज्ञ द्वारा इस रोग का ओटोस्कोप व ऑडियोमीट्री द्वारा परीक्षण कराया जाता है।
इलाज
ओटाइटिस एक्सटर्ना के इलाज में कान का मैल हटाया जाता है। दर्द निवारक दवाओं और एंटीबॉयोटिक्स द्वारा आराम मिलता है। कुछ मामलों में एक मामूली सर्जरी माईरिनगोटॅमी द्वारा भी इलाज होता है।
जटिलताएं
यदि कान में सक्रमण का समय से इलाज न हो, तो बहरापन, हड्डी में सक्रमण और दिमाग में सक्रमण [मेनिनजाइटिस] सभव है। 'फेशियल पेल्सी' नामक रोग के कारण मुंह टेढ़ा हो सकता है।
बचाव
जिन लोगों को सर्दी-जुकाम हो, उनसे दूर रहें। इसी तरह जिन्हें एलर्जी की शिकायत है, उन्हें धूल, गदगी और पराग कणों आदि से दूर रहना चाहिए। फ्लू से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाएं।